घुमन्तू समुदाय छात्रावास का वार्षिकोत्सव सम्पन्न, छात्रावास के बच्चों सहित भामाशाहों का किया सम्मान
श्रीगंगानगर । देशभक्ति, देशप्रेम, स्वधर्म, स्वाभिमान वाले घुमन्तू, अर्द्धघुमन्तू और विमुक्त जनजाति समुदाय के लोग जंगलों में निर्वासित होने के बाद अभिशप्त जीवन जी रहे थें। जबकि प्रत्येक जनजाति का इतिहास गौरवशाली रहा हैं। देश में 81 सालों तक आपराधिक जनजाति अधिनियम 1871 का दंश झेल चुके इस वर्ग को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के साथ ही सामाजिक सम्मान भी बेहद जरूरी है। यह बात अखिल भारतीय घुमन्तू कार्य प्रमुख माननीय दुर्गादास जी ने बुधवार को श्रीगंगानगर स्थित बाबा रामदेव छात्रावास के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता अमरचंद बोरड ने की जबकि ट्रेड ऐसोसिएशन अध्यक्ष भूपेन्द्र आहुजा, वरिष्ठ व्यापारी रविशंकर, एवं कॉलोनाइजर मुकेश शाह विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित रहे। समारोह में छात्रावास में सहयोग करने वाले भामाशाहों को सम्मानित किया गया।
बाबा रामदेव घुमन्तू छात्रावास के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में अतिथियों का भारतीय संस्कृति के अनुरूप स्वागत सम्मान किया गया। इस दौरान घुमन्तू कार्य संयोजक गुरूमुखदास ने प्रस्तावना प्रस्तुत की। वहीं आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में छात्रावास के बच्चों ने देशप्रेम से भक्ति गीतों पर नृत्य एवं शारिरीक प्रदर्शन किया।
समारोह में मुख्यवक्ता अखिल भारतीय घुमन्तू कार्य प्रमुख माननीय दुर्गादास जी ने कहा कि देश के बहुत बड़े वर्ग घुमन्तू,अर्द्ध घुमन्तू एवं विमुक्त समुदाय ने स्वाधीनता संग्राम में अंग्रेजों की प्रताडना सहकर भी राष्ट्रहित में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हीं की पीढ़ी आज भी अभावग्रस्त जीवन जीते हुए आज भी देश व धर्म के साथ खड़े है। कला – कौशल के माध्यम से देश को संवारा व हर क्षेत्र में उंचाईयों तक पहुंचाया। इन्हें मुख्य धारा में जोड़ने व उत्थान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कुरीति उन्मूलन, आवास व सामाजिक सम्मान मिलना बेहद जरूरी है। शासन और समाज से भी अपेक्षा है कि इनके दस्तावेजीकरण और कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित करें जिससे इन्हें मूलभूत सुविधाएं मिल सकें।












